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शुक्रवार, 28 मार्च 2025

चैत्र नवरात्रि 2025: माता दुर्गा का हाथी पर आगमन और नारायणपुर सिमरा में भव्य आयोजन

चैत्र नवरात्रि 2025: माता दुर्गा का हाथी पर आगमन और नारायणपुर सिमरा में भव्य आयोजन







We News 24 Hindi / पवन साह 


सीतामढ़ी:- चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित है। यह पर्व नवसंवत्सर (हिंदू नववर्ष) की शुरुआत का भी प्रतीक है। 2025 में चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से 6 अप्रैल तक मनाई जाएगी, जिसमें विशेष पूजा, व्रत और धार्मिक आयोजन होंगे।




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1. चैत्र नवरात्रि की तिथि और महत्व

शुरुआत और समापन: चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 30 मार्च 2025 (रविवार) से शुरू होकर 7 अप्रैल 2025 (सोमवार) तक मनाई जाएगी। इस दौरान हिंदू नववर्ष (गुड़ी पड़वा) का भी आरंभ होगा 


माता का वाहन: इस बार नवरात्रि का आरंभ और समापन रविवार-सोमवार को होने के कारण मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान हाथी पर होगा, जो शुभ संकेत माना जाता है। हाथी सुख, समृद्धि, अच्छी वर्षा और कृषि उत्पादन में वृद्धि का प्रतीक है 




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2. नारायणपुर सिमरा में भव्य धार्मिक आयोजन

मां बगलामुखी अनुष्ठान: नारायणपुर सिमरा में पीतांबरा फाउंडेशन के तत्वावधान में 30 मार्च से 6 अप्रैल तक मां बगलामुखी का विशेष यज्ञ, शतचंडी पाठ और दुर्गा सप्तशती का पाठ आयोजित किया जाएगा। तांत्रिक लक्ष्मण बाबा के निर्देशन में यह अनुष्ठान देशभर के श्रद्धालुओं, राजनेताओं और साधकों को आकर्षित करेगा 

तांत्रिक लक्ष्मण बाबा
तांत्रिक लक्ष्मण बाबा


उद्देश्य: इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य विश्व शांति, भक्तों की सुख-समृद्धि और नकारात्मक ऊर्जा का निवारण है। पीतांबरा फाउंडेशन द्वारा हर नवरात्रि पर ऐसे अनुष्ठानों की परंपरा रही है 


3. हाथी वाहन का धार्मिक महत्व

शुभ संकेत: हाथी पर माता का आगमन धार्मिक ग्रंथों में आर्थिक उन्नति, राजनीतिक स्थिरता और प्रकृति की अनुकूलता का संकेत देता है। इससे किसानों को अच्छी फसल और समाज में खुशहाली की आशा की जाती है 37।


अन्य वाहनों के प्रभाव: यदि माता घोड़े या पालकी पर आतीं, तो यह संघर्ष या अस्थिरता का संकेत माना जाता, लेकिन हाथी का वाहन विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है 5।


4. विशेष शुभ योग

सर्वार्थ सिद्धि योग: नवरात्रि के पहले दिन (30 मार्च) यह योग शाम 4:35 बजे से अगले दिन सुबह 6:12 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माना गया है 


रवियोग: नवरात्रि के दौरान चार दिन रवियोग का संयोग बन रहा है, जो भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक होगा 11।


5. भक्तों के लिए आवश्यक जानकारी

घटस्थापना मुहूर्त: 30 मार्च को सुबह 6:13 से 10:22 बजे तक कलश स्थापना का शुभ समय है। अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 12:01 से 12:50 बजे) में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है 


नवदुर्गा पूजन: नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक) की आराधना की जाएगी 



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इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व है। माता दुर्गा का हाथी पर आगमन समृद्धि का संकेत देता है, जबकि नारायणपुर सिमरा में आयोजित बगलामुखी अनुष्ठान भक्तों के लिए आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बनेगा। श्रद्धालुओं को नवरात्रि के नियमों का पालन करते हुए मां की भक्ति में डूबने की सलाह दी जाती है। 

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