भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाल ही में जारी अपने प्रेस विज्ञप्ति में चेतावनी दी है कि अगले 4-5 दिनों के दौरान महाराष्ट्र, आंतरिक कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में गरज के साथ बारिश, तेज हवाएं (40-60 किमी/घंटा) और ओलावृष्टि की गतिविधि होने की संभावना है
We News 24 Hindi / कविता चौधरी
नई दिल्ली। भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रशांत महासागर में ला-नीना का प्रभाव अब कमजोर पड़ गया है, जिससे इसके असर का डर लगभग खत्म हो गया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, ला-नीना की स्थिति इस समय बेहद कमजोर है और इसकी अवधि भी बहुत छोटी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मध्य अप्रैल तक यह न्यूट्रल कंडिशन में बदल जाएगा, जो मानसूनी बारिश के लिए अनुकूल माना जाता है।
मानसून की संभावनाएं और IMD का पूर्वानुमान
भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को अप्रैल से जून के मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें तापमान, हीट वेव, बारिश और ला-नीना के प्रभाव का आकलन शामिल है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अभी तक के संकेतों के आधार पर मानसून का पहला चरण कमजोर नहीं होगा, जबकि दूसरे चरण के मानसून की स्थिति का अध्ययन जारी है। आईएमडी हर साल अप्रैल के दूसरे हफ्ते में मानसून के आगमन और इसकी स्थिति का विस्तृत पूर्वानुमान जारी करता है।
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आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि अप्रैल से जून के बीच देश के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम के पहाड़ी क्षेत्रों और कुछ अन्य इलाकों में न्यूनतम तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन अधिकतम तापमान में वृद्धि देखने को मिल सकती है।
हीट वेव का अलर्ट
आईएमडी ने देश के कई हिस्सों के लिए हीट वेव (गर्म लू) को लेकर चेतावनी जारी की है। उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और मध्य-पूर्वी राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में गर्म हवाएं चलने की आशंका है। इन क्षेत्रों में हीट वेव की अवधि दो से छह दिनों तक हो सकती है, वहीं कुछ जगहों पर यह 10 दिनों तक भी प्रभावी रह सकती है। खास तौर पर दिल्ली और उत्तर भारत में 3 अप्रैल के बाद तापमान में तेज उछाल की संभावना है। अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके साथ ही अप्रैल के पहले हफ्ते से हीट वेव शुरू हो सकता है।
बारिश और बाढ़ का खतरा
हीट वेव के बीच राहत की बात यह है कि अप्रैल से जून के दौरान बारिश की स्थिति सामान्य रहने के आसार हैं। आईएमडी के मुताबिक, इस अवधि में 88 से 112 प्रतिशत के बीच वर्षा हो सकती है। जहां बारिश होगी, वहां लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के कारण बाढ़ का खतरा भी बना रह सकता है। देश के कई हिस्सों में मानसून पूर्व की बारिश स्थानीय कारणों से शुरू हो चुकी है, जो मौसम में बदलाव का संकेत दे रही है।
जलवायु परिवर्तन का असर
आईएमडी ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन को मौसम की अनियमितता का प्रमुख कारण बताया। पिछले तीन महीनों में भारत में तापमान की स्थिति असामान्य रही है, जिसमें कभी अचानक ठंड तो कभी तेज गर्मी देखी गई। मार्च में मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहा, बारिश कम हुई और गर्मी ने कोई रिकॉर्ड नहीं तोड़ा। लेकिन अप्रैल में स्थिति बदलने की संभावना है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में तापमान में तेजी से इजाफा होगा और मौसमी उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
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निष्कर्ष
ला-नीना के प्रभाव के खत्म होने से मानसून की उम्मीदें मजबूत हुई हैं, जो भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, हीट वेव और अत्यधिक बारिश के जोखिम को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों में तैयारियां जरूरी हैं। मौसम विभाग की सलाह है कि लोग गर्मी से बचाव के उपाय अपनाएं और स्थानीय प्रशासन बाढ़ जैसी आपदाओं के लिए सतर्क रहे।
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