We News 24 Hindi / दीपक कुमार
नई दिल्ली :- हाल ही में भारत सरकार ने अवैध प्रवासियों, विशेषकर रोहिंग्या मुसलमानों, के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए हैं। यह कदम देश की सुरक्षा, जनसांख्यिकीय संतुलन और नागरिकता कानूनों के सख्त कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। नीचे इस मुद्दे से जुड़े प्रमुख तथ्य और इसके विभिन्न पहलुओं को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है:
प्रमुख तथ्य
अवैध प्रवास पर कार्रवाई:
भारत सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों सहित बांग्लादेशी और अन्य अवैध प्रवासियों को चिह्नित करने और उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे प्रवासियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
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नागरिकता कानूनों में सख्ती:
सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 को लागू किया है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करता है। हालांकि, रोहिंग्या मुसलमानों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, क्योंकि भारत उन्हें "अवैध प्रवासी" मानता है, न कि शरणार्थी।
सुरक्षा चिंताएं:
सरकार और कुछ राजनेताओं का मानना है कि रोहिंग्या और अन्य अवैध प्रवासियों की मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इनमें से कुछ लोग तस्करी, नशीले पदार्थों के व्यापार और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोपों का सामना कर चुके हैं।
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हाल की घटनाएं:
- जनवरी 2025 में, कोलकाता के सियालदह स्टेशन पर तीन रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध रूप से देश में प्रवेश करने और रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
- राजस्थान में जनवरी 2025 में जयपुर पुलिस ने 500 अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया।
- मार्च 2025 में, बीएसएफ ने नॉर्थ-ईस्ट में एक अभियान चलाकर 15 अवैध प्रवासियों को पकड़ा और उनके पास से 187 मोबाइल फोन बरामद किए।
नया विधेयक:
27 मार्च 2025 को, गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में "इमिग्रेशन और विदेशी विधेयक, 2025" पेश करने की घोषणा की। इस विधेयक का उद्देश्य अवैध प्रवास को रोकना और ऐसे लोगों को देश से बाहर करना है, जो अशांति फैलाने या राष्ट्र को असुरक्षित करने के इरादे से भारत में प्रवेश करते हैं।
पृष्ठभूमि
रोहिंग्या कौन हैं?:
रोहिंग्या मुख्य रूप से म्यांमार के रखाइन प्रांत से आने वाली एक मुस्लिम अल्पसंख्यक आबादी है। 2017 में म्यांमार में सैन्य कार्रवाई के बाद लाखों रोहिंग्या पड़ोसी देशों में शरण लेने को मजबूर हुए। भारत में उनकी संख्या 22,000 से अधिक बताई जाती है।
भारत की स्थिति:
भारत 1951 के संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। इसलिए, वह रोहिंग्या को शरणार्थी के रूप में मान्यता देने के लिए बाध्य नहीं है और उन्हें "अवैध प्रवासी" मानता है।
प्रभाव और विवाद
मानवाधिकार संगठनों की चिंता:
संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने भारत के इस रुख की आलोचना की है। उनका कहना है कि रोहिंग्या को वापस म्यांमार भेजना उनके जीवन को खतरे में डाल सकता है, जहां वे नरसंहार और उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं।
राजनीतिक बहस:
विपक्षी दलों, जैसे कांग्रेस, ने इस नीति को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है और विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेजने या वापस लेने की मांग की है। वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मानती है।
सामाजिक असर:
कुछ राज्यों में रोहिंग्या के खिलाफ स्थानीय विरोध देखा गया है। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में "गैर-हिंदुओं और रोहिंग्या मुसलमानों" के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले बोर्ड लगाए गए थे, जिससे विवाद बढ़ा।
1. हरियाणा सरकार की कार्रवाई
हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने राज्य में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान कर उन्हें 12 जनवरी 2025 तक देश से बाहर करने का निर्देश दिया है। रेवाड़ी, नूंह, महेंद्रगढ़ और फरीदाबाद जैसे इलाकों में झुग्गी-झोपड़ियों की छानबीन की जा रही है, जहां अवैध रूप से रोहिंग्या बस गए हैं। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक के लिए इन्हें बसाया था, जबकि अब ये अपराध और देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं।
2. मणिपुर से रोहिंग्या डिपोर्टेशन
मणिपुर सरकार ने म्यांमार से आए रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा कि ये लोग नशा और हथियारों की तस्करी में शामिल हैं और राज्य में हिंसा भड़काने का काम कर रहे हैं8।
3. दस्तावेज़ों की जांच
हरियाणा सरकार ने रोहिंग्याओं के आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी की जांच का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है और कांग्रेस इसे राजनीतिक रंग दे रही है।
4. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
बांग्लादेश भी रोहिंग्या मुसलमानों को वापस लेने से इनकार कर चुका है। उसका कहना है कि म्यांमार को इन्हें स्वीकार करना चाहिए।
इंडोनेशिया ने भी हाल ही में रोहिंग्या शरणार्थियों को अपने तट पर उतरने से रोक दिया, क्योंकि उनका मानना है कि ये अशांति फैलाते हैं।
भारत सरकार का यह कदम अवैध प्रवास को नियंत्रित करने और नागरिकता कानूनों को सख्त करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। हालांकि, यह नीति मानवीय संकट और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पेश करती है। रोहिंग्या मुसलमानों के भविष्य पर इसका असर व्यापक होगा, और यह देखना बाकी है कि यह विधेयक संसद में पारित होता है या नहीं। यह जानकारी आज, 27 मार्च 2025 की तारीख तक उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है।
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