छात्रों ने निवेश के दावों पर सवाल उठाए, जिसका ममता ने सीधा जवाब नहीं दिया। हंगामे के बीच उन्होंने भीड़ को शांत करने की कोशिश की और कहा कि यह व्यवहार संस्थान का अपमान है।
We News 24 Hindi / सुजीत कुमार विश्वास
कोलकता :- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया ब्रिटेन दौरे और लंदन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के केलॉग कॉलेज में उनके भाषण के दौरान जमकर हंगामा हुआ इस घटना में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के छात्र नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें "गो बैक" के नारे लगाए गए और आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए। ममता बनर्जी ने जवाब में कहा कि यह मामला अदालत में है और केंद्र सरकार के अधीन है, साथ ही उन्होंने इसे राजनीतिक मंच न बनाने की अपील की।विरोध की जिम्मेदारी SFI-UK ने ली, जिसने इसे टीएमसी के "भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक शासन" के खिलाफ आवाज बताया।
ये भी पढ़े-पश्चिमी दिल्ली में मुठभेड़: कुख्यात अपराधी आकाश झा उर्फ मोनू घायल
विरोध के प्रमुख कारण
आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामला: छात्रों ने 2024 में हुए ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर केस को लेकर सवाल किया, जिसकी जांच अब CBI कर रही है। ममता ने जवाब दिया: "यह मामला अदालत में है, केंद्र सरकार के पास है। यहां राजनीति मत करो।"
बंगाल में हिंसा और भ्रष्टाचार: SFI के छात्रों ने संदेशखाली गैंगरेप केस और चुनावी हिंसा के मुद्दे भी उठाए।
निवेश के दावों पर सवाल: जब ममता ने बंगाल में "लाखों करोड़ के निवेश" का दावा किया, तो एक छात्र ने निवेशकों के नाम पूछे, जिस पर ममता ने कहा: "बहुत सारे हैं..
ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया
तस्वीर दिखाकर भावुक अपील: ममता ने 1990 के दशक की एक तस्वीर दिखाई, जिसमें उनके सिर पर चोट के निशान थे। उन्होंने कहा: "देखिए, मुझे मारने की कोशिश की गई थी।
ये भी पढ़े-दिल्ली पुलिस की FIR से अरविंद केजरीवाल की फिर मुश्किलें बढ़ीं ,जानें- क्या है मामला?
धर्मनिरपेक्षता का दावा: उन्होंने कहा, "मैं हर धर्म—हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई—का सम्मान करती हूं।
रॉयल बंगाल टाइगर वाली रवायत: विरोध के जवाब में ममता ने कहा: "दीदी साल में दो बार आएगी और टाइगर की तरह लड़ेगी। आप कहें तो कपड़े धो दूंगी, लेकिन झुकने वाली नहीं हूं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
SFI-UK का बचाव: संगठन ने फेसबुक पर लिखा कि यह विरोध "टीएमसी के भ्रष्ट शासन" के खिलाफ था।
बीजेपी की आलोचना: बीजेपी ने ममता के "भारत की आर्थिक प्रगति पर संदेह" जताने और विदेश में देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया।
TMC का समर्थन: टीएमसी ने ममता को "रॉयल बंगाल टाइगर" बताते हुए उनकी दृढ़ता की सराहना की।
ये भी पढ़े-राणा सांगा पर मचा बवाल खड़गे ने कहा कि संविधान घर जलाने की इजाजत नहीं देता
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
ऑक्सफोर्ड प्रशासन की भूमिका: केलॉग कॉलेज के प्रो-वाइस चांसलर जोनाथन मिची ने ममता को आमंत्रित किया था, लेकिन विरोध के बाद उनकी छवि को लेकर बहस छिड़ गई। मीडिया कवरेज: बीबीसी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस घटना को "भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियों" से जोड़कर देखा।
यह घटना ममता बनर्जी के वैश्विक राजनीतिक प्रभाव और बंगाल में उनकी सरकार के विवादों को उजागर करती है। SFI के विरोध ने छात्र आंदोलनों की भूमिका को रेखांकित किया, जबकि ममता की प्रतिक्रिया ने उनकी जननायक वाली छवि को मजबूत किया। अब नजर बंगाल की राजनीति पर है, जहां यह मुद्दा 2026 के चुनावों में गरमा सकता है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद