We News 24 Hindi / अंजली कुमारी
नई दिल्ली। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 (Waqf Amendment Bill 2025) पारित हो गया है। इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि 232 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। लोकसभा में इस विधेयक को लेकर जोरदार बहस हुई, जिसमें सरकार और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। जहां सरकार इस विधेयक को पारदर्शिता और सुधार का एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे संविधान विरोधी और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दे रहा है।
विधेयक पर सरकार का पक्ष
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना और पारदर्शिता लाना इसका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा, "कुछ लोग यह अफवाह फैला रहे हैं कि इस अधिनियम से मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों और उनकी संपत्तियों में हस्तक्षेप होगा। यह पूरी तरह गलत है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि वक्फ बोर्ड में किसी भी गैर-मुस्लिम को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है।
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अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि "विपक्ष वोट बैंक की राजनीति कर रहा है, जबकि भाजपा सरकार न्याय और पारदर्शिता के लिए यह कानून लाई है।" उन्होंने यह भी बताया कि "2001-2012 के बीच दो लाख करोड़ की वक्फ संपत्ति निजी संस्थानों को सौ साल की लीज पर दी गई, जिससे मुसलमानों के विकास में बाधा आई।"
विपक्ष का विरोध
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए जोरदार विरोध किया। असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में इस विधेयक की प्रति फाड़ते हुए कहा कि यह "अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन है।" उन्होंने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय है और इसका उद्देश्य उन्हें अपमानित करना है।
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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष के किसी भी संशोधन को स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने कहा, "हमने ऐसी कोई जेपीसी नहीं देखी, जिसमें एक भी क्लॉज पर चर्चा न की गई हो।" कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार "भारतीय समाज को धर्म के आधार पर विभाजित करने की कोशिश कर रही है।"
एनडीए सहयोगी दलों का समर्थन
लोकसभा में जदयू, टीडीपी और लोजपा (आर) समेत एनडीए के सभी सहयोगी दल पूरी तरह एकजुट नजर आए और विधेयक के पक्ष में मतदान किया। जेडीयू सांसद ललन सिंह ने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है, बल्कि पारदर्शिता लाने का प्रयास है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे बेवजह इस मुद्दे को तूल दे रहे हैं।
टीडीपी सांसद कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह मुस्लिम और अल्पसंख्यक कल्याण के प्रति उनकी पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विपक्षी एकता में फूट
जहां कांग्रेस और ओवैसी के नेतृत्व में विपक्ष इस विधेयक का विरोध कर रहा था, वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने इसे भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति बताया। अखिलेश यादव ने कहा, "भाजपा का असली लक्ष्य वक्फ बोर्ड की जमीन है, जिसे वे हड़पना चाहते हैं।"
हालांकि, विपक्षी एकता में दरार भी नजर आई। शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने जेपीसी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से विधेयक के खिलाफ सख्त रुख नहीं अपनाया। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करती है और इसे एक ऐतिहासिक कदम मानती है।
सड़कों पर विरोध प्रदर्शन
विधेयक के पारित होने के बाद, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कई मुस्लिम संगठनों ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आज़ाद समाज पार्टी-कांशीराम के सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि वे इस विधेयक के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और सड़क से संसद तक इसका विरोध करेंगे।
निष्कर्ष
वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का लोकसभा में पारित होना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। सरकार इसे मुस्लिम समाज के कल्याण और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जरूरी बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करार दे रहा है। इस विधेयक को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है और आगामी चुनावों में यह एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है।
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